श्री बजरंग बाण का महत्व (Shri Bajrang Baan Mahatva)
सनातन धर्म में हनुमान जी को कलयुग का जाग्रत देवता माना जाता है। जब जीवन में घोर संकट आए और हर रास्ता बंद हो जाए, तब ‘श्री बजरंग बाण (Shri Bajrang Baan)‘ का पाठ सबसे अचूक उपाय है। मान्यता है कि जहाँ अन्य उपाय काम नहीं करते, वहाँ बजरंग बाण तुरंत असर दिखाता है।
“बजरंग” का अर्थ है वज्र जैसा मजबूत शरीर और “बाण” का अर्थ है तीर। जिस तरह धनुष से छूटा तीर सीधे लक्ष्य पर लगता है, उसी तरह इस पाठ को करने से भक्त की पुकार सीधे हनुमान जी तक पहुँचती है।
जब कोई व्यक्ति बड़े संकट, डर, दुश्मनों की परेशानी, मानसिक तनाव या किसी भी तरह की नकारात्मक ऊर्जा से घिर जाता है, तब पूरे विश्वास के साथ बजरंग बाण का पाठ किया जाता है।
यह पाठ न केवल जीवन की कठिन समस्याओं को दूर करता है, बल्कि इंसान के भीतर साहस, आत्मबल और खोया हुआ भरोसा वापस जगाता है। संकट के समय हनुमान जी की शरण में जाने का यह सबसे उत्तम जरिया है।
आइए, जानते हैं श्री हनुमान जी की पूजा की सही विधि और इस पावन बजरंग बाण का संपूर्ण मूल पाठ।
श्री बजरंग बाण के चमत्कारी लाभ (Benefits of Shri Bajrang Baan)
- शत्रुओं पर विजय: अगर कोई आपका बिना कारण दुश्मन बना हुआ है और कोई उपाय काम नहीं कर रहा, तो यह बाण उस पर विजय दिलाता है।
- ग्रह दोषों से मुक्ति: कुंडली में शनि, मंगल या किसी भी ग्रह के दोष से छुटकारा पाने के लिए यह अचूक उपाय है।
- भय और नकारात्मकता का नाश: भूत-प्रेत, नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों से बचाव के लिए इससे बढ़कर कुछ नहीं।
- कष्टों का तत्काल निवारण: जब लगे कि अब और नहीं हो सकता, तब बजरंग बाण पढ़ने से हनुमान जी तुरंत सहायता करते हैं।
- वास्तु दोष निवारण: घर में पंचमुखी हनुमान जी की मूर्ति स्थापित कर बजरंग बाण पढ़ने से वास्तु दोष दूर होता है।
- विवाह संबंधी अड़चनें दूर: कुंडली में मांगलिक दोष हो, तो इसके नियमित पाठ से विवाह के रास्ते की बाधाएं हटती हैं।
सावधानी: यह स्तोत्र बहुत शक्तिशाली है। इसे हर दिन नहीं पढ़ना चाहिए। यह केवल गंभीर संकट के समय ही पढ़ा जाता है, क्योंकि इसमें हनुमान जी को शपथ (राम की सौगंध) दी जाती है। अगर आप नियमित रूप से हनुमान जी की पूजा करना चाहते हैं, तो हनुमान चालीसा का पाठ करें।
श्री बजरंग बाण पाठ विधि (Puja Vidhi)
अगर आप संकट में हैं और बजरंग बाण पाठ करना चाहते हैं, तो इन नियमों का पालन करें:
समय: मंगलवार या शनिवार से शुरू करें। सुबह स्नान करके पाठ करें। श्री राम नाम का स्मरण करें।
वस्त्र: लाल रंग के वस्त्र धारण करें। लाल फूल, सिंदूर और चोला अर्पित करें।
अवधि: इसे 41 दिनों तक लगातार करें। इन दिनों ब्रह्मचर्य का पालन करें और मांस-मदिरा का त्याग करें।
संकल्प: हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएँ। पाठ शुरू करने से पहले हाथ में जल लेकर हनुमान जी के समक्ष अपना प्रयोजन (मनोकामना) बताएं और पाठ करने का संकल्प लें। श्री राम नाम का स्मरण करें।
संख्या: एक दिन में 7 बार बजरंग बाण का पाठ करें। इसके बाद एक बार हनुमान चालीसा पढ़कर समापन करें।
सावधानी: पाठ के दौरान शब्दों का उच्चारण साफ और स्पष्ट होना चाहिए। किसी का बुरा करने की कामना के साथ यह पाठ न करें।
श्री बजरंग बाण (Shri Bajrang Baan Lyrics)
॥ दोहा ॥
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥
॥ चौपाई ॥
जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
जन के काज बिलंब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥
जैसे कूदि सिंधु महिपारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥
आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुरलोका॥
जाय बिभीषन को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा॥
बाग उजारि सिंधु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा॥
अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा॥
लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुर पुर में भई ॥
अब विलम्ब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु उर अन्तर्यामी ॥
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होई दुख हरहु निपाता ॥
जै गिरिधर जै जै सुख सागर। सुर समूह समरथ भटनागर ॥
ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमन्त हठीले। बैरिहिं मारू बज्र की कीले ॥
गदा बज्र लै बैरिहिं मारो। महाराज प्रभु दास उबारो ॥
ॐ कार हुंकार महाप्रभु धावो। बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो ॥
ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा ॥
सत्य होहु हरि शपथ पायके। रामदूत धरु मारु धाय के ॥१६॥
जय जय जय हनुमंत अगाधा। दु:ख पावत जन केहि अपराधा ॥
पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत कछु दास तुम्हारा ॥
वन उपवन, मग गिरि गृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं ॥
पाँय परौं कर जोरि मनावौं। यहि अवसर अब केहि गोहरावौं ॥
जय अंजनि कुमार बलवन्ता। शंकर सुवन वीर हनुमंता ॥
बदन कराल काल कुल घालक। राम सहाय सदा प्रति पालक ॥
भूत प्रेत पिशाच निशाचर। अग्नि बेताल काल मारी मर ॥
इन्हें मारु तोहिं शपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की ॥
जनक सुता हरि दास कहावौ। ताकी शपथ विलम्ब न लावो ॥
जै जै जै धुनि होत अकासा। सुमिरत होत दुसह दुःख नाशा ॥
चरण शरण कर जोरि मनावौं। यहि अवसर अब केहि गौहरावौं ॥
उठु उठु चलु तोहिं राम दुहाई। पायँ परौं कर जोरि मनाई ॥
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता ॥
ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल दल ॥
अपने जन को तुरत उबारो। सुमिरत होय आनन्द हमारो ॥
यह बजरंग-बाण जेहि मारै। ताहि कहौ फिरि कवन उबारै॥
पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करैं प्राण की ॥
यह बजरंग बाण जो जापैं। तासों भूत-प्रेत सब कापैं ॥
धूप देय अरु जपै हमेशा। ताके तन नहिं रहै कलेशा ॥
॥ दोहा ॥
प्रेम प्रतीतहि कपि भजै, सदा धरैं उर ध्यान ।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान ॥
॥ इति श्री बजरंग बाण सम्पूर्ण ॥
Shri Bajrang Baan Lyrics in English
॥ Doha ॥
Nishchay prem priti te, vinay karain sanmaan |
Tehi ke kaaraj sakal shubh, siddha karain Hanuman ||
॥ Chaupai ॥
Jai Hanumant sant hitkari | Sun leejai prabhu araj hamari ||
Jan ke kaaj vilamb na keejai | Aatur dauri maha sukh deejai ||
Jaise koodi sindhu mahipaara | Surasa badan paithi vistara ||
Aage jaay Lankini roka | Marehu laat gayi suraloka ||
Jaay Vibhishan ko sukh deenha | Sita nirakhi param pad leenha ||
Baag ujari sindhu mahan bora | Ati aatur jam kaatar tora ||
Akshay Kumar mari sanhaara | Loom lapeti Lank ko jaara ||
Laah samaan Lank jari gayi | Jai Jai dhuni sur pur mein bhayi ||
Ab vilamb kehi kaaran swami | Kripa karahu ur antaryami ||
Jai Jai Lakshman praan ke daata | Aatur hoyi dukh harahu nipaata ||
Jai Giridhar Jai Jai sukh saagar | Sur samuh samrath bhatnagar ||
Om Hanu Hanu Hanu Hanu Hanumant hatheele | Bairiheen maaru vajra kee keele ||
Gada vajra lai bairiheen maaro | Maharaj prabhu daas ubhaaro ||
Omkaar hunkar mahaprabhu dhaavo | Vajra gada hanu vilamb na laavo ||
Om hrim hrim hrim Hanumant kapeesa | Om hum hum hum Hanu ari ur sheesa ||
Satya hohu Hari shapath paayake | Ramdoot dharu maaru dhaay ke ||
Jai Jai Jai Hanumant agaadha | Dukh paavat jan kehi apraadha ||
Pooja jap tap nem achaara | Nahin jaanat kachhu daas tumhaara ||
Van upvan, mag giri griha maahin | Tumhare bal hum darapat naahin ||
Paay paron kar jori manaavon | Yahi avasar ab kehi goharaavon ||
Jai Anjani kumar balvanta | Shankar suvan veer Hanumanta ||
Badan karaal kaal kul ghaalaka | Ram sahay sada prati paalak ||
Bhoot pret pishach nishachar | Agni Betaal kaal maari mara ||
Inhen maaru tohini shapath Ram ki | Raakhu naath marjaada naam ki ||
Janak suta Hari daas kahaavon | Taki shapath vilamb na laavon ||
Jai Jai Jai dhuni hot aakaasa | Sumirat hot dusah dukh naasha ||
Charan sharan kar jori manaavon | Yahi avasar ab kehi goharaavon ||
Uthu uthu chalu tohi Ram duhai | Paay paron kar jori manai ||
Om cham cham cham cham chapal chalanta | Om Hanu Hanu Hanu Hanu Hanumanta ||
Om han han haank det kapi chanchal | Om san san sahami paraane khal dal ||
Apne jan ko turat ubhaaro | Sumirat hoy aanand hamaaro ||
Yah Bajrang-Baan jehi maare | Taahi kahou phiri kavan ubaare ||
Paath karai Bajrang Baan ki | Hanumat raksha karain praan ki ||
Yah Bajrang Baan jo jaapein | Taason bhoot-pret sab kaapein ||
Dhup dey aru japai hamesha | Taake tan nahi rahai kalesha ||
॥ Doha ॥
Prem pritahi kapi bhajai, sada dharain ur dhyaan |
Tehi ke kaaraj sakal shubh, siddha karain Hanuman ||
FAQ – Shri Bajrang Baan
प्रश्न 1. क्या बजरंग बाण रोज पढ़ सकते हैं?
उत्तर: नहीं, बजरंग बाण को रोज नहीं पढ़ना चाहिए। यह बहुत शक्तिशाली स्तोत्र है और इसमें हनुमान जी को शपथ दी जाती है। इसे केवल गंभीर संकट या विशेष कार्य सिद्धि के लिए पढ़ा जाता है। रोजाना पूजा के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करें।
प्रश्न 2: बजरंग बाण पढ़ने का सबसे अच्छा समय क्या है?
उत्तर: सबसे अच्छा समय सुबह ब्रह्म मुहूर्त में है। इसकी शुरुआत मंगलवार या शनिवार से करना विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। शाम के समय भी पाठ कर सकते हैं।
प्रश्न 3. बजरंग बाण और हनुमान चालीसा में क्या अंतर है?
उत्तर: हनुमान चालीसा स्तुति और महिमा का पाठ है, जबकि बजरंग बाण संकट निवारण और त्वरित सहायता की प्रार्थना के रूप में अधिक प्रसिद्ध है।
प्रश्न 4. क्या बजरंग बाण से भय दूर होता है?
उत्तर: भक्तों की मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक पाठ करने से मनोबल बढ़ता है और भय कम होता है।
प्रश्न 5. एक दिन में कितनी बार बजरंग बाण पढ़ना चाहिए?
उत्तर: एक दिन में 7 बार बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए। इसके बाद एक बार हनुमान चालीसा पढ़कर समापन करें।
प्रश्न 6: क्या महिलाएं बजरंग बाण पढ़ सकती हैं?
उत्तर: हाँ, महिलाएं भी पूरी श्रद्धा के साथ बजरंग बाण का पाठ कर सकती हैं। इसमें किसी भी तरह का कोई भेदभाव नहीं है। हालाँकि, मासिक धर्म के दौरान पाठ न करना ही उचित माना जाता है।
प्रश्न 7: बजरंग बाण का पाठ करते समय क्या सावधानियां रखनी चाहिए?
उत्तर: इसका पाठ करते समय तन और मन की शुद्धता अनिवार्य है। जब तक आप बजरंग बाण का अनुष्ठान कर रहे हों, तब तक पूरी तरह से सात्विक रहें, तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) से बिल्कुल दूर रहें और किसी के प्रति मन में गलत विचार न लाएं।
🙏 जय बजरंगबली! जय श्री राम! 🙏

