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Shiv Tandav Stotram Lyrics, Meaning, Vidhi & FAQ | शिव तांडव स्तोत्रम् का पाठ, सरल हिन्दी अर्थ, महत्व, लाभ, पाठ विधि


श्री शिव तांडव स्तोत्रम् का महत्व (Shiv Tandav Stotram mahatva)

श्री शिव तांडव स्तोत्रम् (Shiv Tandav Stotram) लंकेश रावण के द्वारा भगवान शिव की स्तुति में गाया गया, एक अत्यंत प्रसिद्ध संस्कृत स्तोत्र है। इसमें भगवान शिव के जटाजूट, गंगा, चंद्रमा, नाग, तीसरे नेत्र, डमरू, तांडव और उनके विराट स्वरूप का प्रभावशाली वर्णन किया गया है। 

इस स्तोत्र की भाषा बहुत ओजपूर्ण है। इसके शब्दों में एक विशेष लय और गति दिखाई देती है। यही कारण है कि इसका पाठ करते समय भक्त को भगवान शिव के तांडव स्वरूप का ध्यान करने में सहजता होती है।

शिव तांडव स्तोत्र केवल भगवान शिव के रौद्र रूप का वर्णन नहीं करता। इसमें भक्ति, समर्पण, वैराग्य, समान दृष्टि और आत्मशुद्धि जैसे भाव भी दिखाई देते हैं।

आइए, जानते हैं भगवान शिव की पूजा की सही विधि और इस पावन शिव तांडव स्तोत्रम् का संपूर्ण मूल पाठ।

श्री शिव तांडव स्तोत्रम्  के चमत्कारी लाभ (Benefits of Shiv tandav stotram)

  • असीम आत्मबल और साहस की प्राप्ति: इस स्तोत्र की ध्वनियों और संस्कृत छंदों में इतनी ऊर्जा है कि इसके पाठ से मन का भय समाप्त होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • शनि और राहु दोष से मुक्ति: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जो लोग शनि की ढैय्या, साढ़ेसाती या राहु के अशुभ प्रभाव से पीड़ित हैं, उनके लिए यह पाठ अत्यंत कल्याणकारी है।
  • वाक्-सिद्धि और एकाग्रता: इसके कठिन संस्कृत शब्दों का उच्चारण करने से वाणी शुद्ध होती है और मस्तिष्क की एकाग्रता में सुधार होता है।
  • धन और संपत्ति में वृद्धि: रावण ने इस स्तोत्र के माध्यम से शिव जी की कृपा पाकर अतुलनीय शक्ति और धन प्राप्त किया था। इसका पाठ दरिद्रता का नाश करता है।

श्री शिव तांडव स्तोत्रम् पाठ विधि (Shiv Tandav Stotram Puja Vidhi)

शिव तांडव स्तोत्रम् का पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए इसे सही नियम और विधि से करना चाहिए:

  • आरती और क्षमा याचना: पाठ पूर्ण होने के बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र की एक माला का जाप करें और शिव जी की आरती करें।
  • समय का चयन: इस पाठ को प्रातःकाल सूर्योदय के समय या संध्याकाल (प्रदोष काल) में करना सबसे उत्तम माना जाता है।
  • दिशा और आसन: उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुशा या ऊन के स्वच्छ आसन पर बैठें।
  • शिवलिंग पूजन: पाठ शुरू करने से पहले तांबे के पात्र से शिवलिंग पर जल अर्पित करें। इसके बाद बेलपत्र, श्वेत पुष्प और भस्म चढ़ाएं।
  • दीपक और धूप: देसी घी का दीपक और धूपबत्ती जलाएं।
  • स्पष्ट उच्चारण: इस स्तोत्र के संस्कृत छंदों का उच्चारण पूरी स्पष्टता और तेज लय के साथ करें। यदि संस्कृत पढ़ने में कठिनाई हो, तो आप दिए गए Hinglish रूप का प्रयोग कर सकते हैं।

श्री शिव तांडव स्तोत्रम्  (Shiv tandav stotram Lyrics)

जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थले, गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम् ।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं, चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ॥१॥ 

जिनके सघन जटा रूपी वन से बहने वाली गंगा जी की धाराओं से जिनका कण्ठ प्रदेश पवित्र है, जिनके गले में बड़े-बड़े साँपों की लंबी मालाएँ लटक रही हैं, और जो अपने हाथ के डमरू से ‘डम-डम’ की भयंकर ध्वनि करते हुए प्रचंड तांडव नृत्य करते हैं, वे भगवान शिव हमारा कल्याण करें।

जटाकटाहसम्भ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्झरी, विलोलवीचिवल्लरीविराजमानमूर्धनि ।
धगद्धगद्धगज्जलल्ललाटपट्टपावके, किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ॥२॥ 

भजिनके सिर रूपी बर्तन में देवताओं की नदी गंगा जी की चंचल लहरें चक्कर काटती हुई लहरा रही हैं, जिनके मस्तक की अग्नि ‘धग-धग’ करके जल रही है, और जिनके मस्तक पर बाल-चंद्रमा सुशोभित हैं, उन भगवान शिव में मेरा मन हर क्षण लीन रहे।

धराधरेन्द्रनंदिनी विलासबन्धुबन्धुर, स्फुरद्दिगन्तसन्तति प्रमोद मानमानसे।
कृपाकटाक्षधोरणी निरुद्धदुर्धरापदि, क्वचिद्दिगम्बरे मनोविनोदमेतु वस्तुनि ॥३॥

हिमालय पुत्री माता पार्वती के विलासपूर्ण कटाक्षों से जिनका मन आनंदित रहता है, जिनकी कृपा दृष्टि मात्र से भक्तों की बड़ी से बड़ी विपत्तियाँ दूर हो जाती हैं, ऐसे दसों दिशाओं को वस्त्र के रूप में धारण करने वाले (दिगंबर) शिव जी में मेरा मन सदा आनंद पाए।

जटाभुजङ्गपिङ्गल स्फुरत्फणामणिप्रभा, कदम्बकुङ्कुमद्रव प्रलिप्तदिग्वधूमुखे।
मदान्धसिन्धुरस्फुरत्त्वगुत्तरीयमेदुरे, मनोविनोदमद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि ॥४॥

जिनके जटाओं में लिपटे हुए साँपों के फणों की मणियों का लाल-पीला प्रकाश दिशाओं रूपी स्त्रियों के मुख पर केसर के लेप के समान चमक रहा है, और जो मदमत्त हाथी की छाल को वस्त्र के रूप में धारण किए हुए हैं, उन भूतनाथ शिव जी के स्मरण में मुझे अलौकिक सुख मिले।

सहस्रलोचन प्रभृत्यशेषलेखशेखर प्रसूनधूलिधोरणी विधूराङ्घ्रिपीठभूः।
भुजङ्गराजमालया निबद्धजाटजूटकः श्रियै चिराय जायतां चकोरबन्धुशेखरः ॥५॥

इंद्रदेव आदि समस्त देवताओं के मस्तक के फूलों की धूल से जिनके चरण-कमल ढके हुए हैं, जिनकी जटाएँ नागराज की माला से बंधी हुई हैं, और जिनके मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित हैं, वे भगवान शिव हमें चिरकाल के लिए अक्षय संपत्ति और कल्याण प्रदान करें।

ललाटचत्वरज्वलद्धनञ्जयस्फुलिङ्गभा निपीतपञ्चसायकं नमन्निलिम्पनायकम्‌।
सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं महाकपालि सम्पदे शिरो जटालमस्तु नः ॥६॥

जिन्होंने अपने मस्तक की अग्नि की चिंगारियों से कामदेव को भस्म कर दिया था, जिन्हें समस्त देवराज प्रणाम करते हैं, और जो अमृतमयी चंद्रमा की कलाओं से सुशोभित हैं, उन महाकापालिक शिव जी की जटाएँ हमें जीवन की परम संपत्ति प्रदान करें।

करालभालपट्टिका धगद्धगद्धगज्ज्वल द्धनञ्जयाहुतिकृत प्रचण्डपञ्चसायके।
धराधरेन्द्रनन्दिनी कुचाग्रचित्रपत्रक प्रकल्पनैकशिल्पिनी त्रिलोचने रतिर्मम ॥७॥

जिन्होंने अपने विशाल मस्तक पर ‘धग-धग’ जलती हुई अग्नि में कामदेव की आहुति दे दी, और जो माता पार्वती के वक्षस्थल पर सुंदर पत्र-रचना करने वाले एकमात्र अलौकिक शिल्पी हैं, उन त्रिनेत्रधारी शिव जी में मेरी अनन्य भक्ति बनी रहे।

नवीनमेघमण्डली निरुद्धदुर्धरस्फुर त्कुहूनिशीथिनीतमः प्रबन्धबद्धकन्धरः।
निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिन्धुरः कलानिधानबन्धुरः श्रियं जगद्धुरंधरः ॥८॥

जिनका कण्ठ प्रदेश नए बादलों से घिरी हुई अमावस की रात के समान गहरा काला (नीलकण्ठ) है, जो गंगा जी को धारण किए हुए हैं, हाथी की छाल पहने हैं और चंद्रमा की कलाओं से युक्त हैं, वे जगत् के स्वामी शिव जी हमारी सुख-समृद्धि में वृद्धि करें।

प्रफुल्लनीलपङ्कज प्रपञ्चकालिमप्रभा वलम्बिकण्ठकन्दली रुचिप्रबद्धकन्धरम्‌।
स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं गजच्छिदान्धकच्छिदं तमन्तकच्छिदं भजे ॥९॥

जिन्होंने खिले हुए नीले कमल की तरह अपने कण्ठ में विष धारण किया है, जो कामदेव, त्रिपुरासुर, संसार के बंधनों, दक्ष-यज्ञ, गजासुर, अंधकासुर और स्वयं यमराज का भी अंत करने वाले हैं, उन संकटमोचन महाकाल शिव जी का मैं बारंबार भजन करता हूँ।

अखर्वसर्वमङ्गला कलाकदम्बमञ्जरी रसप्रवाहमाधुरी विजृम्भणामधुव्रतम्‌।
स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं गजान्तकान्धकान्तकं तमन्तकान्तकं भजे ॥१०॥

जो कल्याणकारी कलाओं के कदंब पुष्पों से बहने वाले मकरंद की तरह अत्यंत मनोहर हैं, जो कामदेव, त्रिपुरासुर, संसार चक्र, दक्ष-यज्ञ और यमराज के भी संहारक हैं, उन परम मंगलकारी भगवान शिव की मैं शरण लेता हूँ।

जयत्वदभ्रविभ्रमभ्रमद्भुजंगमश्वस द्विनिर्गमत् क्रमस्फुरत् कराल भाल हव्यवाट्।
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदङ्गतुङ्गमङ्गल ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्डताण्डवः शिवः ॥११॥

जिनके मस्तक पर तेजी से घूमते हुए साँपों के फण से ‘धग-धग’ अग्नि निकल रही है, और मृदंग की ‘धिमि-धिमि’ मंगलमयी ध्वनि के साथ जो प्रचंड तांडव नृत्य कर रहे हैं, उन महाबली भगवान शिव की सर्वत्र जय हो।

दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजङ्गमौक्तिकस्रजोर् गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः।
तृणारविन्दचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः सम प्रवृत्तिकः कदा सदाशिवं भजाम्यहम्‌ ॥१२॥

कठोर पत्थर और कोमल बिछौने पर, साँपों की माला और मोतियों के हार पर, बहुमूल्य रत्नों और मिट्टी के ढेरों पर, मित्र और शत्रु पर, तिनके और कमल पर, तथा साधारण प्रजा और राजा पर समान दृष्टि रखने वाला समभाव रखते हुए मैं कब भगवान सदाशिव की भक्ति में लीन हो पाऊँगा?

कदा निलिम्पनिर्झरी निकुञ्जकोटरे वसन्‌ विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमञ्जलिं वहन्‌।
विलोललोललोचनो ललामभाललग्नकः शिवेति मंत्रमुच्चरन्‌ कदा सुखी भवाम्यहम्‌ ॥१३॥

मैं कब गंगा जी के तट की पवित्र गुफाओं में रहकर, अपनी बुरी बुद्धि का त्याग करके, हाथों को सिर पर जोड़कर, चंचल आँखों को छोड़कर और मस्तक पर भस्म लगाकर ‘शिव-शिव’ मंत्र का उच्चारण करते हुए परम सुख को प्राप्त करूँगा?

इमं हि नित्यमेव मुक्तमुत्तमोत्तमं स्तवं पठन्स्मरन्‌ ब्रुवन्नरो विशुद्धिमेति संततम्‌।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं विमोहनं हि देहिनां सुशङ्करस्य चिंतनम् ॥१४॥

जो व्यक्ति इस उत्तम से उत्तम स्तोत्र का नित्य पाठ करता है या स्मरण करता है, वह सदा शुद्ध रहता है। उसकी भगवान शिव के चरणों में अटूट भक्ति बनी रहती है और उसे जीवन-मरण के बंधन से मुक्ति मिल जाती है।

पूजा वसान समये दशवक्त्रगीतं, यः शम्भुपूजनपरं पठति प्रदोषे | 
तस्य स्थिरां रथगजेन्द्रतुरङ्गयुक्तां लक्ष्मीं सदैव सुमुखिं प्रददाति शम्भु: ||१५|| 

जो मनुष्य संध्या के समय (प्रदोष काल में) शिव पूजा के अंत में रावण द्वारा रचित इस स्तोत्र का पाठ करता है, शिव जी की कृपा से उसके घर में रथ, हाथी, घोड़ों से युक्त स्थिर लक्ष्मी सदा निवास करती हैं।

इति श्रीरावण – कृतम् शिव – ताण्डव – स्तोत्रम् सम्पूर्णम् || 

Shiv Tandav Stotram Lyrics in English

Jataatavi Galajjala Pravaha Pavita Sthale
Gale’valambya Lambitaam Bhujanga Tunga Maalikaam।
Damad Damad Damad Damanninada Vaddamarvayam
Chakaara Chanda Taandavam Tanotu Nah Shivah Shivam॥1॥

Jata Kataaha Sambhrama Bhraman Nilimpa Nirjhari
Vilola Vichi Vallari Virajamaana Murdhani।
Dhagad Dhagad Dhagajjvala Lalaata Patta Paavake
Kishora Chandra Shekhare Ratih Pratikshanam Mama॥2॥

Dharaadharendra Nandini Vilaasa Bandhu Bandhura
Sphurad Diganta Santati Pramoda Maana Maanase।
Kripa Kataksha Dhorani Niruddha Durdharaapadi
Kwachid Digambare Mano Vinodametu Vastuni॥3॥

Jata Bhujanga Pingala Sphurat Phana Mani Prabha
Kadamba Kunkuma Drava Pralipta Digvadhu Mukhe।
Madaandha Sindhura Sphurat Tvag Uttariya Medure
Mano Vinodam Adbhutam Bibhartu Bhuta Bhartari॥4॥

Sahasra Lochana Prabhrity Ashesha Lekha Shekhara
Prasuna Dhuli Dhorani Vidhuraanghri Peetha Bhuh।
Bhujanga Raja Maalaya Nibaddha Jata Jutakah
Shriyai Chiraaya Jayataam Chakora Bandhu Shekharah॥5॥

Lalaata Chatvara Jvalad Dhananjaya Sphulinga Bhaa
Nipita Pancha Saayakam Naman Nilimpa Naayakam।
Sudha Mayukha Lekhaya Virajamaana Shekharam
Mahakaapali Sampade Shiro Jataalam Astu Nah॥6॥

Karaala Bhaala Pattika Dhagad Dhagad Dhagajjvala
Dhananjaya Ahuti Krita Prachanda Pancha Saayake।
Dharaadharendra Nandini Kuchagra Chitra Patraka
Prakalpanaika Shilpini Trilochane Ratir Mama॥7॥

Naveena Megha Mandali Niruddha Durdhara Sphurat
Kuhu Nishithini Tamah Prabandha Baddha Kandharah।
Nilimpa Nirjhari Dharas Tanotu Kritti Sindhurah
Kala Nidhana Bandhurah Shriyam Jagad Dhurandharah॥8॥

Praphulla Neela Pankaja Prapancha Kaalima Prabha
Valambi Kantha Kandali Ruchi Prabaddha Kandharam।
Smarachchidam Purachchidam Bhavachchidam Makhachchidam
Gajachchid Andhakachchidam Tamantakachchidam Bhaje॥9॥

Akharva Sarva Mangala Kala Kadamba Manjari
Rasa Pravaha Madhuri Vijrimbhana Madhuvratam।
Smarantakam Purantakam Bhavantakam Makhantakam
Gajantak Andhakantakam Tamantakantakam Bhaje॥10॥

Jayatvadabhra Vibhrama Bhramad Bhujangama Shvasa
Dvinirgamat Krama Sphurat Karaala Bhaala Havyavaat।
Dhimid Dhimid Dhimid Dhvanan Mridanga Tunga Mangala
Dhvani Krama Pravartita Prachanda Taandavah Shivah॥11॥

Drishad Vichitra Talpayor Bhujanga Mauktika Srajor
Garishtha Ratna Loshthayoh Suhrid Vipaksha Pakshayoh।
Trina Aravinda Chakshushoh Prajaa Mahi Mahendrayoh
Sama Pravrittikah Kada Sadashivam Bhajamyaham॥12॥

Kada Nilimpa Nirjhari Nikunja Kotare Vasan
Vimukta Durmatih Sada Shirahstham Anjalim Vahan।
Vilola Lola Lochano Lalaama Bhaala Lagnakah
Shiveti Mantram Uchcharan Kada Sukhi Bhavaamyaham॥13॥

Imam Hi Nityam Eva Muktam Uttamottamam Stavam
Pathan Smaran Bruvannaro Vishuddhim Eti Santatam।
Hare Gurau Subhaktim Aashu Yaati Na Anyatha Gatim
Vimohanam Hi Dehinaam Sushankarasya Chintanam॥14॥

Puja Vasaana Samaye Dashavaktra Geetam
Yah Shambhu Pujana Param Pathati Pradoshe।
Tasya Sthiraam Ratha Gajendra Turanga Yuktaam
Lakshmim Sadaiva Sumukhim Pradadaati Shambhuh॥15॥

Frequently Asked Questions FAQ – Shiv Tandav Stotram

Q1. क्या शिव तांडव स्तोत्रम् का पाठ घर पर किया जा सकता है?
उत्तर: हाँ, आप अपने घर के पूजा स्थान में शिवलिंग या शिव जी की तस्वीर के सम्मुख बैठकर पवित्रता के साथ इसका पाठ कर सकते हैं।

Q2. क्या शिव तांडव स्तोत्रम् का पाठ रोज करना चाहिए?
उत्तर: नित्य पाठ करना अत्यंत शुभ होता है। यदि प्रतिदिन संभव न हो, तो सोमवार और प्रदोष व्रत के दिन इसका पाठ अवश्य करना चाहिए।

Q3. क्या महिलाएं शिव तांडव स्तोत्रम् का पाठ कर सकती हैं?
उत्तर: बिलकुल, महिलाएं और माताएं भी पूरी श्रद्धा और स्वच्छता के नियमों का पालन करते हुए इस स्तोत्र का पाठ कर सकती हैं।

Q4. शिव तांडव स्तोत्रम् पढ़ने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
उत्तर: इस स्तोत्र के पाठ के लिए शाम का समय (प्रदोष काल) सबसे फलदायी माना गया है, क्योंकि श्लोक 15 में स्वयं प्रदोष काल में पाठ करने की महिमा बताई गई है।

Q5. अगर संस्कृत पढ़ने में समस्या हो तो क्या करें?
उत्तर: यदि आप संस्कृत नहीं पढ़ पाते, तो भक्तिभाव के साथ इसका इंग्लिश पाठ (English Lyrics) पढ़ सकते हैं या इसके हिंदी अर्थ का ध्यान कर सकते हैं।

🙏 ॐ नमः शिवाय। हर हर महादेव! 🙏

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