“मधुराष्टकम्” दो शब्दों से बना है—मधुर + अष्टकम्।
“मधुर” का अर्थ है मीठा, सुंदर, मनभावन और आनंद देने वाला, जबकि “अष्टकम्” का अर्थ आठ श्लोकों का समूह है।
Madhurashtakam भगवान श्रीकृष्ण (Lord Krishna) की भक्ति में रचा गया एक सुंदर, अत्यंत मधुर और भावपूर्ण अष्टक है। इसमें श्रीकृष्ण के रूप, मुस्कान, वाणी, बाँसुरी, नृत्य, मित्रता, यमुना, गायों और उनकी लीलाओं की मधुरता का वर्णन किया गया है। परंपरागत रूप से इसे श्री वल्लभाचार्यजी की रचना माना जाता है।
इस स्तोत्र का सबसे सुंदर भाव है—“मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्”, अर्थात् मधुरता के स्वामी श्रीकृष्ण (Krishna) का सब कुछ मधुर है।
मान्यता है कि जो भक्त प्रतिदिन भावपूर्ण होकर मधुराष्टकम् का पाठ करता है, उसके जीवन से कटुता दूर होती है और उसे श्री बांके बिहारी जी की अनन्य कृपा और प्रेम की प्राप्ति होती है।
श्री मधुराष्टकम् का महत्व (Importance of Madhurashtakam)
- कृष्ण प्रेम और भक्ति की प्राप्ति: मधुराष्टकम् का नियमित पाठ करने से साधक का मन शांत होता है और श्री कृष्ण के प्रति निष्काम प्रेम जगता है।
- मानसिक तनाव और कटुता का नाश: यदि मन में नकारात्मक विचार आते हों या वाणी में कठोरता हो, तो इसके पाठ से स्वभाव में मधुरता और चित्त में प्रसन्नता आती है।
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार: इसके मधुर शब्दों के उच्चारण से घर और आसपास का वातावरण भक्तिमय तथा सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है।
- संतान सुख और पारिवारिक प्रेम: वल्लभ संप्रदाय में माना जाता है कि बाल-मुकुंद के इस पाठ से घर में बच्चों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है और आपस में प्रेम बढ़ता है।
श्री मधुराष्टकम् के चमत्कारी लाभ (Benefits of Madhurashtakam)
नियमित श्रद्धापूर्वक पाठ से भक्त को:
- भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।
- मन को शांत और सकारात्मक रखने में मदद मिल सकती है।
- भक्ति और प्रार्थना के लिए नियमित समय निकालने की प्रेरणा मिल सकती है।
- श्रीकृष्ण के सुंदर स्वरूप और लीलाओं का ध्यान करने का अवसर मिलता है।
- मन में प्रेम, विनम्रता और समर्पण का भाव बढ़ सकता है।
- परिवार के साथ पाठ करने से घर में भक्तिमय वातावरण बन सकता है।
श्री मधुराष्टकम् पाठ विधि (Madhurashtakam Puja Vidhi)
मधुराष्टकम् के पाठ के लिए कोई बहुत कठिन पूजा-विधि आवश्यक नहीं है। इसे घर में अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार पढ़ा जा सकता है।
- समय: मधुराष्टकम् का पाठ प्रातःकाल या संध्या के समय करना सबसे अच्छा माना जाता है।
- तैयारी: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में श्री कृष्ण या बाल-गोपाल (लड्डू गोपाल) की मूर्ति के समक्ष बैठें।
- दीपक और भोग: शुद्ध घी का दीपक जलाएं, तुलसी पत्र के साथ माखन, मिसरी या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं।
- भावपूर्ण पाठ: इस अष्टक को केवल पढ़ें नहीं, बल्कि श्री कृष्ण के मधुर रूप का ध्यान करते हुए प्रेमपूर्वक और लयबद्ध तरीके से गाएं।
- आरती: पाठ समाप्त होने के बाद ‘हरे कृष्ण’ महामंत्र का जाप करें या श्री कृष्ण जी की आरती उतारें।
श्री मधुराष्टकम् अर्थ सहित (Madhurashtakam Lyrics in Hindi and Meaning)
अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम्।
हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥ १ ॥
श्री कृष्ण के होंठ मधुर हैं, उनका मुखड़ा मधुर है, उनकी आँखें मधुर हैं और उनकी मुस्कान भी अत्यंत मधुर है।
उनका हृदय मधुर है और उनकी चाल भी मधुर है। मधुरता के स्वामी श्री कृष्ण का तो सब कुछ ही मधुर है।
वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम्।
चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥ २ ॥
उनकी बोली मधुर है, उनका चरित्र मधुर है, उनके वस्त्र मधुर हैं और उनका लचकना (अंग-भंगी) भी मधुर है।
उनका चलना मधुर है और उनका घूमना भी मधुर है। मधुरता के स्वामी श्री कृष्ण का सब कुछ ही मधुर है।
वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ।
नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥ ३ ॥
उनकी बांसुरी मधुर है, उनके चरणों की धूलि मधुर है, उनके हाथ मधुर हैं और उनके पैर भी मधुर हैं।
उनका नृत्य मधुर है और उनकी मित्रता भी अत्यंत मधुर है। मधुरता के राजा श्री कृष्ण का सब कुछ ही मधुर है।
गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम्।
रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥ ४ ॥
उनके गाए गीत मधुर हैं, उनका पीतांबर (पीला वस्त्र) मधुर है, उनका भोजन करना मधुर है और उनका सोना भी मधुर है।
उनका अनुपम रूप मधुर है और उनके मस्तक का तिलक भी मधुर है। मधुरता के स्वामी श्री कृष्ण का सब कुछ ही मधुर है।
करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरम्।
वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥ ५ ॥
उनके कार्य मधुर हैं, उनका दुख से उबारना (तैरना) मधुर है, उनका मन मोह लेना (हरण) मधुर है और उनका लीलाएं करना मधुर है।
उनका प्रकट होना मधुर है और उनका शांत रूप भी मधुर है। मधुरता के स्वामी श्री कृष्ण का सब कुछ ही मधुर है।
गुंजा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा।
सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥ ६ ॥
उनकी गुंजा की माला मधुर है, उनकी वैजयंती माला मधुर है, श्री यमुना जी मधुर हैं और यमुना जी की लहरें भी मधुर हैं।
यमुना जी का जल मधुर है और उसमें खिले कमल भी मधुर हैं। मधुरता के राजा श्री कृष्ण का सब कुछ ही मधुर है।
गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरम्।
दृष्टं मधुरं शिष्टं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥ ७ ॥
उनकी गोपियाँ मधुर हैं, उनकी रासलीला मधुर है, उनका मिलना मधुर है और उनका बिछड़ना भी मधुर है।
उनकी दृष्टि मधुर है और उनका शिष्टाचार (व्यवहार) भी मधुर है। मधुरता के स्वामी श्री कृष्ण का सब कुछ ही मधुर है।
गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा।
दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥ ८ ॥
उनके ग्वाल-बाल मधुर हैं, उनकी गायें मधुर हैं, उनकी लाठी मधुर है और उनकी पूरी सृष्टि ही मधुर है।
उनका संहार करना (दुष्टों का दमन) मधुर है और उनका फल देना भी मधुर है। अंत में, संपूर्ण मधुरता के स्वामी श्री कृष्ण का तो सब कुछ ही अत्यंत मधुर है।
॥ इति श्रीमद्वल्लभाचार्यविरचितं मधुराष्टकं सम्पूर्णम् ॥
Madhurashtakam Lyrics in English
Adharam Madhuram Vadanam Madhuram Nayanam Madhuram Hasitam Madhuram |
Hridayam Madhuram Gamanam Madhuram Madhuradhipater Akhilam Madhuram || 1 ||
Vachanam Madhuram Charitam Madhuram Vasanam Madhuram Valitam Madhuram |
Chalitam Madhuram Bhramitam Madhuram Madhuradhipater Akhilam Madhuram || 2 ||
Venur Madhuro Renur Madhurah Panir Madhurah Padau Madhurau |
Nrityam Madhuram Sakhyam Madhuram Madhuradhipater Akhilam Madhuram || 3 ||
Geetam Madhuram Peetam Madhuram Bhuktam Madhuram Suptam Madhuram |
Rupam Madhuram Tilakam Madhuram Madhuradhipater Akhilam Madhuram || 4 ||
Karanam Madhuram Taranam Madhuram Haranam Madhuram Ramanam Madhuram |
Vamitam Madhuram Shamitam Madhuram Madhuradhipater Akhilam Madhuram || 5 ||
Gunja Madhura Mala Madhura Yamuna Madhura Veechi Madhura |
Salilam Madhuram Kamalam Madhuram Madhuradhipater Akhilam Madhuram || 6 ||
Gopi Madhura Leela Madhura Yuktam Madhuram Muktam Madhuram |
Drishtam Madhuram Shishtam Madhuram Madhuradhipater Akhilam Madhuram || 7 ||
Gopa Madhura Gavo Madhura Yashtir Madhura Srishtir Madhura |
Dalitam Madhuram Phalitam Madhuram Madhuradhipater Akhilam Madhuram || 8 ||
|| Iti Shrimadvallabhacharyavirachitam Madhurashtakam Sampurnam ||
Frequently Asked Questions FAQ – Madhurashtakam
Q1. मधुराष्टकम् की रचना किसने की थी?
उत्तर: मधुराष्टकम् की रचना वल्लभ संप्रदाय के संस्थापक और महान वैष्णव संत महाप्रभु वल्लभाचार्य जी ने की थी।
Q2. क्या मधुराष्टकम् का पाठ रोज किया जा सकता है?
उत्तर: जी हाँ, मधुराष्टकम् का रोज पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है। इससे मन को शांति मिलती है और घर में खुशहाली बनी रहती है।
Q3. मधुराष्टकम् पढ़ने से क्या लाभ होता है?
उत्तर: इस स्तोत्र के पाठ से भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है, मन में प्रेम और भक्ति जागृत होती है, और मानसिक शांति मिलती है। यह भक्त को भगवान की दिव्य मधुरता का अनुभव कराता है।
Q4. क्या बच्चे भी मधुराष्टकम् सीख सकते हैं?
उत्तर: बिलकुल, इसके श्लोक बहुत ही सरल और संगीतमय हैं। बच्चों को यह पाठ सिखाने से उनकी स्मरण शक्ति और संस्कार बेहतर होते हैं।
श्री मधुराष्टकम् केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि यह श्री कृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पण और रसभरी भक्ति की अभिव्यक्ति है। मधुराष्टकम् के आठों श्लोकों में “मधुरम्” की पुनरावृत्ति के माध्यम से श्रीकृष्ण के स्वरूप, व्यवहार, बांसुरी, नृत्य, यमुना, गोप-गोपियों और उनकी लीलाओं तक हर चीज को मधुर बताया गया है। इस स्तोत्र का पाठ या श्रवण मन को शीतल करता है और एक अलग ही आनंद की अनुभूति कराता है। यदि आप भी अपने जीवन में भक्ति का मिठास घोलना चाहते हैं, तो नित्य भक्तिधर्म (BhaktiDharm.in) पर मधुराष्टकम् का पाठ अवश्य करें।
राधे राधे। 🙏 जय श्रीकृष्ण ! 🙏


