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Maine Tere Hi Bharose Hanuman Bhajan Lyrics in Hindi & English | मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान

मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान – Maine Tere Hi Bharose Hanuman Bhajan Lyrics & Meaning

Caption: Maine Tere Hi Bharose Hanuman | Suneel Lodhi | Hanuman Ansh | Hanuman Bhajan | Sagar Mein Naiya Dal Dai Lyrics | Neem Karoli Baba

“Maine Tere Hi Bharose Hanuman” एक भावपूर्ण हनुमान भजन है, जिसमें भक्त अपने जीवन की नैया पूरी तरह श्री हनुमान जी के भरोसे छोड़ने की भावना व्यक्त करता है। हनुमान जी को संकटमोचन और कलयुग के प्रत्यक्ष देवता के रूप में पूजा जाता है। जब जीवन में कठिन परिस्थितियाँ, चिंता या अनिश्चितता घेर लेती है, तब यह भावपूर्ण भजन, एक भक्त को मानसिक बल और गहरी शांति प्रदान करता है। इस भजन में राम नाम, भक्ति, ज्ञान, शरणागति और ईश्वर पर अटूट विश्वास को बहुत सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इसे पारंपरिक लोक-भजन के रूप में भी प्रस्तुत किया जाता है और 2026 की फिल्म “Hanuman Ansh” से भी यह भजन व्यापक रूप से जुड़ा है।

Maine Tere Hi Bharose Hanuman Bhajan Lyrics in Hindi (मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान भजन – हिंदी लिरिक्स)

मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई॥
मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई॥

अरे काहे की वा नाव बनाई, काहे की पतवार?
हाँ काहे की वा नाव बनाई, काहे की पतवार?

ए रामा, काहे की लगा दई जंजीर?
सागर में नैया डार दई॥
ओ मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई॥

अरे राम-नाम की नाव बनाई, भक्ति की पतवार।
हाँ राम-नाम की नाव बनाई, भक्ति की पतवार।
रामा, ज्ञान की लगा दई जंजीर, सागर में नैया डार दई॥
ओ मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई॥

अरे कौन सखी वामें बैठनहारी है, कौन पार लगावे?
हाँ कौन सखी वामें बैठनहारी है, कौन पार लगावे?
रामा, कौन है खेवनहार? सागर में नैया डार दई॥
ओ मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई॥

अरे सीता सखी वामें बैठनहारी है, रामा पार लगावे।
रामा, हनुमत खेवनहार, सागर में नैया डार दई॥
ओ मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई॥

सागर में नैया डार दई॥
सागर में नैया डार दई॥
सागर में नैया डार दई॥

ओ मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई॥
ओ मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई॥

Maine Tere Hi Bharose Hanuman Bhajan (Lyrics in English)

Maine Tere Hi Bharose Hanuman, Sagar Mein Naiya Daar Dai.
Maine Tere Hi Bharose Hanuman, Sagar Mein Naiya Daar Dai. 

Are Kaahe Ki Va Naav Banai, Kaahe Ki Patvaar?
Haan Kaahe Ki Va Naav Banai, Kaahe Ki Patvaar?
E Raama, Kaahe Ki Laga Dai Zanjeer? Sagar Mein Naiya Daar Dai.
O Maine Tere Hi Bharose Hanuman, Sagar Mein Naiya Daar Dai.

Are Ram-Naam Ki Naav Banai, Bhakti Ki Patvaar.
Haan Ram-Naam Ki Naav Banai, Bhakti Ki Patvaar.
Raama, Gyaan Ki Laga Dai Zanjeer, Sagar Mein Naiya Daar Dai.
O Maine Tere Hi Bharose Hanuman, Sagar Mein Naiya Daar Dai.

Are Kaun Sakhi Vaame Baithanhaari Hai, Kaun Paar Lagaave?
Haan Kaun Sakhi Vaame Baithanhaari Hai, Kaun Paar Lagaave?
Raama, Kaun Hai Khevanihaar? Sagar Mein Naiya Daar Dai.
O Maine Tere Hi Bharose Hanuman, Sagar Mein Naiya Daar Dai.

Are Seeta Sakhi Vaame Baithanhaari Hai, Raama Paar Lagaave.
Raama, Hanumat Khevanihaar, Sagar Mein Naiya Daar Dai.
O Maine Tere Hi Bharose Hanuman, Sagar Mein Naiya Daar Dai. 

Sagar Mein Naiya Daar Dai.
Sagar Mein Naiya Daar Dai.
Sagar Mein Naiya Daar Dai. 

O Maine Tere Hi Bharose Hanuman, Sagar Mein Naiya Daar Dai.
O Maine Tere Hi Bharose Hanuman, Sagar Mein Naiya Daar Dai.

भजन की भावना और अर्थ (Meaning of Bhajan)

“मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई“

यह भजन भक्त और हनुमान जी के बीच के उस अटूट विश्वास को दिखाता है, जहाँ भक्त अपनी जीवन-नैया को पूरी तरह उन्हें सौंप देता है। भक्त कहता है – हे हनुमान जी, मैंने अपनी नाव इस भवसागर में तुम्हारे भरोसे छोड़ दी है। अब तुम ही मेरे खेवनहार हो।

“राम-नाम की नाव बनाई, भक्ति की पतवार“

भक्त बताता है कि उसकी नाव राम-नाम की है। उसकी पतवार यानी डंडा भक्ति है। और ज्ञान की जंजीर लगाई गई है। यानी भक्ति, ज्ञान और राम-नाम – ये तीनों मिलकर जीवन की नैया को पार लगाते हैं।

“सीता सखी वामें बैठनहारी है, रामा पार लगावे“

भक्त पूछता है – इस नाव में बैठने वाला कौन है? तो उत्तर मिलता है – सीता माता साथ हैं और राम पार लगाने वाले हैं। और हनुमान खेवनहार हैं।

भावना: यह भावपूर्ण भजन हमें यह गहरा आध्यात्मिक संदेश देता है कि जब हम अपने जीवन की डोर पूरी तरह प्रभु को सौंप देते हैं, तब भय और चिंता समाप्त हो जाती है। भक्त जब अपने अहंकार को त्यागकर हनुमान जी के चरणों में पूर्ण शरणागति ले लेता है, तो कठिन से कठिन राहें भी आसान हो जाती हैं।

भजन का आध्यात्मिक मर्म और महत्व:

  • अटूट शरणागति (Unshakable Faith): जब इंसान संसार की अनिश्चितताओं से थककर प्रभु हनुमान जी पर अटूट भरोसा कर लेता है, तो उसकी जीवन-रूपी नैया स्वतः सुरक्षित तट की ओर बढ़ने लगती है।
  • साधन और माध्यम: इस भजन में राम-नाम को नाव, भक्ति को पतवार और ज्ञान को मज़बूत जंजीर के रूप में दर्शाया गया है, जो इस भवसागर से पार उतरने का सबसे सरल मार्ग है।
  • दैवीय सहारा (Divine Guidance): माता सीता का आशीर्वाद, प्रभु श्री राम की कृपा और श्री हनुमान जी का खेवनहार रूप भक्त के मन में असीम साहस, शक्ति और मानसिक शांति भर देता है।
  • सच्चा समर्पण: जब सब कुछ ईश्वर के विधान पर छोड़ दिया जाता है, तो जीवन की हर चुनौती और संकट दूर हो जाता है। पूरे भजन में प्रेम, भक्ति और पूर्ण समर्पण का अत्यंत मधुर भाव समाहित है।

मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई॥
अरे राम–नाम की नाव बनाई, भक्ति की पतवार।
रामा, ज्ञान की लगा दई जंजीर, सागर में नैया डार दई॥

जय श्री राम! जय हनुमान! 

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